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जानें बाबा रामदेव ने क्या कहा हस्थमैथुन पर


आज कल सृष्टि के नियमों के विपरीत ह स्त मै थु न, गुदा मै थु न और अयोनि मै थु न जैसी बुरे की बहुत चाल हो गयी है. इन कुकर्मों के कारण से ही, आज प्राय 50 से 80  फीसदी भारतीय बल वीर्यहीन नपुंसक हो रहें हैं. प्राय: 90 फीसदी युवा प्रमेह जैसे रोग में फंस कर अपनी जिंदगी के दिन निश्तेज हो कर जैसे तैसे काट रहें हैं. आज हम आपको सिर्फ हस्त मैथुन से होने वाले बुरे नतीजों से अवगत कराने जा रहें हैं. तांकि भारतीय युवा इस बुरे से अपने आप को बचाकर अपना जीवन तेजोमय कांतिमय बना कर संसार के सामने एक मिसाल पेश करें और भारत फिर से विश्व सिरताज बने.

सृष्टि नियमो के विपरीत – ह स्त मै थु न प्रक्रिया सृष्टि के नियमों के बिलकुल विपरीत है. क्षणिक आनंद प्राप्त करने के लिए, बेवकूफ और नादान लोग नीचों की सोहबत में पड़ कर शिशन को हाथ से पकड़कर हिलाते या रगड़ते हैं और मात्र 2 सेकंड का आनंद प्राप्त कर के अपना बेशकीमती वीर्य निकाल कर अपने आप को कांतिहीन, ओजहीन, वीर्यहीन कर बैठतें हैं. यह प्रक्रिया इतनी बुरी है के अंग्रेजी में इसको सेल्फ पोल्यूशन, डेथ डीलिंग, हेल्थ डिस्ट्रॉयिंग आदि नाम से इसको संज्ञा दी गयी है.

सत्यानाशी क्रिया – भारतीय संस्कृति में इसको सत्यानाशी क्रिया कहा गया है. इससे चेहरे की रौनक मारी जाती है. शकल सूरत बिगड़ जाती है. आँखें बैठ जाती हैं. मुंह लम्बा हो जाता है. दृष्टि नीचे की और रहती है. इस कर्म को करने वाला सदा चिंतित और भयभीत रहता है. उसकी छाती कमज़ोर हो जाती है. दिल और दिमाग में ताक़त नहीं रहती. नींद कम आती है. ज़रा सी बात से घबरा उठता है. रात को बुरे बुरे स्वपन आते हैं. हाथ पैर शीतल रहते हैं.

मानसिक रोग – अगर इतने में ही ये क्रिया नहीं छोड़ते तो नसें खिंचने और तनने तथा सिकुड़ने लगती है. पीछे मृगी या उन्माद आदि मानसिक रोग हो जाते हैं. इसके अलावा स्मरण शक्ति या याददाश्त कम हो जाती है. बातें याद नहीं रहती, शरीर में तेज़ी और फुर्ती नहीं रहती, काम धंधे को दिल नहीं चाहता, उत्साह नहीं रहता, मन चंचल रहता है, बात बात में वहम होने लगता है, दिमागी काम तो हो ही नहीं सकते.

पेशाब के रोग – पेशाब करते समय नसों में दर्द होता है, पेशाब करने की बार बार इच्छा होती है, और पेशाब करते समय वीर्य गिरने लग जाता है. लिंग का मुंह भी लाल हो जाता है, स्वपन दोष होने लगता है. urine ब्लैडर में भारीपन रहता है. इसके बाद धातु सम्बन्धी अनेक रोग हो जाते हैं. इस बुरे में फंसकर युवा भरी जवानी में ही बूढा हो जाता है.

शरीर में त्रुटी – शरीर की ग्रोथ रुक जाती है. आँखें बैठ जाती है. आँखों के इर्द गिर्द काले घेरे बन जाते हैं. नज़र कमज़ोर हो जाती है. बाल गिर जाते हैं. गंज हो जाती है.पीठ और कमर में दर्द रहने लगता है. जननेंद्रिय कमज़ोर हो जाती है. इसकी सीधाई नष्ट हो जाती है. बांकपन या टेढ़ापन आ जाता है


नपुंसकता – ह स्त मै थु न करने वाले को नपुंसकता का शिकार होना पड़ता है. उसकी स्त्री सहवास की इच्छा समाप्त हो जाती है. और अगर होती भी है तो शीघ्र ही शिथिलता हो जाती है अथवा शीघ्र ही वीर्यपात हो जाता है. और इस रोग के बारे में कहाँ तक लिखें, आधुनिक भारत में युवाओं के जितने भी शरीरिक और मानसिक रोग आज हैं उन सबमे 90 फीस्दी से बड़ा कारण यही महामारी है. यह रोग ऐसा है के आज अनेक घर संतानहीन हो रहें हैं और उनको टेस्ट tube करवाने पड़ रहें हैं. हम यहीं आशा रखते हैं के ये लेख सभी युवाओं तक पहुंचे और वो इस बुरी बीमारी से अपने आप को बचाएं. और जो भाई इस बुरे को छोड़ना चाहते हैं और इस के कारण जो भी कमजोरी आई हैं वो हमारी ये पुरानी पोस्ट पढ़ कर अपना जीवन नव निर्माण कर सकते हैं.

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